महाराष्ट्र राजनीतिक थ्रिलर का हुआ आखिर अंत; देवेन्द्र फडणवीस, अजीत पवार ने इस्तीफा दिया, उद्धव ठाकरे बनेंगे नए मुख्यमंत्री 

Team Suno Neta  Tuesday 26th of November 2019 10:31 PM
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महा विकास अगाडी के नेता सोमवार को मुंबई के होटल ग्रैंड हयात में।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना की गठबंधन का मुख्यमंत्री के पद को लेकर टूटने से उत्पन्न हुआ महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट का अंत मंगलवार को तब हुआ जब भाजपा के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उनके उप-मुख्यामंत्री राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक दाल के नेता अजीत पवार ने अपना अपना त्यागपत्र दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा फडणवीस को राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास करने के लिए एक दिन दिए जाने के बाद विकास हुआ है। इससे अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार की NCP और कांग्रेस के लिए राज्य में सरकार बनाने का दावा करने का रास्ता साफ हो गया है।

इससे पहले, शनिवार की सुबह देवेंद्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक दाल के नेता अजीत पवार को उप-मुख्यमंत्री के रूप में  राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शपथ दिलाई। यह एक कदम था जो देश को आश्चर्यचकित कर दिया क्यों की राज्य राष्ट्रपति शासन के आधीन था। यह बाद में स्पष्ट हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान के विशेष प्रावधानों का उपयोग कर शनिवार काफी सवेरे बिना कैबिनेट की मंजूरी लिए राष्ट्रपति शाशन को हटाने की राज्यपाल के सिफारिश को मान लिया।

भाजपा के 105 विधायकों और एनसीपी के 54 के साथ फड़नवीस और अजीत पवार के “गठबंधन” का मार्ग सरकार बनाने के लिए काफी था, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार किया और सुबह-सुबह सीएम और डिप्टी सीएम के रूप में दोनों को शपथ दिलाई। राज्यपाल ने उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 14 दिन का समय भी दिया।

इस नाटकीय घटना से चकित NCP नेता शरद पवार ने घोषणा की कि अजीत पवार, जो उनके भतीजे हैं, ने भाजपा से हाथ मिलाने के लिए उनका या उनके पार्टी का कोई समर्थन नहीं हैं। बाद में NCP ने अजित पवार को पार्टी से निष्कासित कर दिया। घंटों पहले, शुक्रवार को, शिवसेना, NCP और कांग्रेस (44 विधायकों के साथ) ने घोषणा की थी कि तीन दल जल्द ही सरकार बनाने का दावा करेंगे इस समझ के साथ कि शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री होंगे।

रविवार को NCP ने मुंबई के होटल ग्रैंड हयात में अपने अधिकांश विधायकों को शिवसेना के विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ रखा और कड़ी निगरानी राखी गयी ताकि उन्हें भाजपा-अजीत पवार खेमे में लुभाने के किसी भी प्रयास को विफल किया जा सके। सोमवार को देवेंद्र फड़नवीस और अजीत पवार को आमंत्रित करने, गुप्-चुप तरीके से सरकार बनाने देने और उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 14 दिन का समय के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगी। 

इस बीच, सोमवार शाम को शरद पवार, उद्धव ठाकरे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने-अपने पार्टी विधायकों को ग्रैंड हयात पत्रकारों के सामने पेश किया और दावा किया कि गठबंधन को 162 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो 288-सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के आधे से अधिक है। मीडिया से बातचीत के बाद उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे एक साथ आएंगे जो भाजपा की तरफ बढ़ सकते हैं।

मंगलवार को, सुप्रीम कोर्ट, जिसने सोमवार को अपना आदेश सुरक्षित रखा था, ने फैसला सुनाया कि देवेंद्र फड़नवीस और अजीत पवार की सरकार को एक दिन के भीतर विधानसभा में पर अपना बहुमत साबित करना होगा न कि  राज्यपाल द्वारा दिए गए 14 दिनों में। जब यह स्पष्ट हो गया की भाजपा और अजित पवार के पास बहुमत साबित करने के लिए संख्या नहीं हैं, अजीत पवार ने पहले उप-मुख्यमंत्री और फिर देवेंद्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

बाद में, मंगलवार शाम को, शिवसेना, NCP और कांग्रेस के विधायकों ने अपने गठबंधन को “महा विकास अगाड़ी” (MVA) का नाम दिया हैं, एक प्रस्ताव पारित करके शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री नामित किया। MVA ने कहा कि अगर राज्यपाल सरकार बनाने के उनके दावे को स्वीकार करते हैं, जो एक औपचारिकता है, तो नई सरकार रविवार को शपथ लेगी।


 
 

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