स्विस कोर्ट ने विजय माल्या की दलीलों को किया रद्द, CBI को उसके बैंक की जानकारी हासिल करने का रास्ता हुआ साफ़  

Team Suno Neta Tuesday 22nd of January 2019 11:29 AM
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विजय माल्या

नई दिल्ली: भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के बैंक खाते का विवरण भारत को भेजने के मुद्दे पर स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल के न्यायाधीशों ने माल्या की याचिका को खारिज कर दिया। माल्या ने अपनी दलील में कहा था कि  CBI की कार्यवाही “गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण’’ थी क्योंकि महत्वपूर्ण जांचकर्ता (CBI निदेशक राकेश अस्थाना) स्वयं भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस में यह बताया गया है।  

माल्या की याचिका को खारिज करने का फैसला गोथम डाइजेस्ट ने लिया, जो स्विस फेडरल कोर्ट के लिए सभी म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) से जुड़े मामलों की निगरानी करते हैं। डाइजेस्ट ने कहा कि माल्या के स्विस वकील की यह दलील की उसके खिलाफ मामले की जांच कर रहे अधिकारी (राकेश अस्थाना) पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, इसे कोर्ट स्वीकार नहीं करती है।

26 नवंबर और 29 नवंबर को लॉज़ेन में स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल द्वारा तीन निर्णय सुनाए गए थे।

माल्या के वकीलों ने CBI तक उसके बैंक खातों की डिटेल्स पहुंचने से रोकने के लिए आखिरी दांव चला था। उन्होंने मानवाधिकार पर यूरोपीय सम्मेलन (ECHR) की धारा 6 का हवाला दिया जिसके अनुसार हर व्यक्ति को निष्पक्ष ट्रायल का अधिकार है और इसे CBI प्रमुख पर चल रहे भ्रष्टाचार के आरोपों से जोड़ दिया।

अपने फैसले में स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल जज ने कहा कि इस मामले में ECHR के उल्लंघन की याचिका लागू नहीं होती है। इससे पहले माल्या ने कहा था कि भारत की सरकार ने उसके खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध छेड़ा हुआ है। इसी वजह से उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और जांच शुरू की हुई है। हालांकि जज ने ब्रिटेन में रहने के पीछे दिए इस आधार को खारिज कर दिया था।

स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल में दायर अपीलें 14 अगस्त, 2018 के तीन आदेशों का पालन करती हैं। जिसनें कांटन ऑफ जेनेवा के सरकारी अभियोजक से कहा गया है कि वह माल्या के बैंक खातों का विवरण भारत को दे दे। इसके लिए CBI ने MLAT के तहत अनुरोध भी किया है। गौरतलब है कि 10 दिसंबर, 2018 को ब्रिटेन की एक अदालत ने माल्या को भारत में प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी थी।

29 नवंबर, 2018 को स्विस फेडरल ट्रिब्यूनल के एक अन्य आदेश में कहा गया कि माल्या और उसकी कंपनी के खातों का विवरण भारत में भेजने के लिए मंजूरी दे दी गई थी क्योंकि यह अनुरोध भारत और स्विट्जरलैंड के बीच व्यापक पारस्परिक संभव सहायता की अवधारणा के अनुरूप था।


 

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